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23/02/2021
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23/02/2021
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05/02/2021
कल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस था जिस प्रकार यह कैंसर की बीमारी भारत में तेजी से पैर पसार रही है और एक विकराल रूप धारण करती जा रही है इसके लिए मैंने कुछ अलग-अलग सोर्स से डाटा इकट्ठा किया है दैनिक भास्कर मैं छपी रिपोर्ट साथ में ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी डब्ल्यूएचओ 2018 के आंकड़े
रिपोर्ट्स:भारत में हर 10 कैंसर मरीजों में से 7 की मौत हो जाती है, यहां एक डॉक्टर पर 2000 मरीजों का बोझ होता है
नई दिल्ली 9 महीने पहले
भारत में हर 10 कैंसर मरीजों में से 7 की मौत हो जाती है, यहां एक डॉक्टर पर 2000 मरीजों का बोझ होता है
डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में कैंसर के 1.81 करोड़ मामले आए, 96 लाख मौतें भी हुईं
जर्नल ऑफ ग्लोबल ऑन्कोलॉजी में 2017 में पब्लिश हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक, विकसित देशों के मुकाबले भारत में कैंसर मरीजों की मौत की दर दोगुनी है
कुछ ही महीनों पहले बॉलीवुड ने अपने दो बेहतरीन कलाकार खो दिए। दोनों को वह बीमारी थी, जो दुनिया की हर छठी मौत का कारण बनती है। ऋषि कपूर को ब्लड कैंसर था और इरफान खान को ब्रेन कैंसर। दोनों का इलाज देश में भी चला और विदेश में भी, लेकिन इलाज के 2 साल के अंदर ही दोनों की मौत हो गई।
हर साल देश और दुनिया में कैंसर से लाखों मौत होती हैं। डबल्यूएचओ के एक अनुमान के मुताबिक, 2018 में कैंसर से कुल 96 लाख मौतें हुईं थीं। इनमें से 70% मौतें गरीब देश या भारत जैसे मिडिल इंकम देशों में हुईं। इसी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कैंसर से 7.84 लाख मौतें हुईं। यानी कैंसर से हुईं कुल मौतों की 8% मौतें अकेले भारत में हुईं।
जर्नल ऑफ ग्लोबल ऑन्कोलॉजी में 2017 पब्लिश हुई एक स्टडी के मुताबिक, भारत में कैंसर से मरने वालों की दर विकसित देशों से लगभग दोगुनी है। इसके मुताबिक भारत में हर 10 कैंसर मरीजों में से 7 की मौत हो जाती है जबकि विकसित देशों में यह संख्या 3 या 4 है। रिपोर्ट में इसका कारण कैंसर का इलाज करने वाले डॉक्टरों की कमी बताया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2000 कैंसर मरीजों पर महज एक डॉक्टर है। अमेरिका में कैंसर मरीजों और डॉक्टरों का यही रेशियो 100:1 है, यानी भारत से 20 गुना बेहतर।
कम डॉक्टर होने के बावजूद भारत में कैंसर के कई बड़े अस्पताल हैं, जहां स्पेशलिस्ट और सुविधाएं बेहतर हैं। खाड़ी देशों समेत कई अफ्रीकी देशों के मरीज भी यहां इलाज के लिए आते हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि विकसित देशों के मुकाबले में भारत में कैंसर का बेहद सस्ता इलाज होता है। लेकिन इसके बावजूद भारत से कई लोग विदेशों में कैंसर का इलाज करवाना पसंद करते हैं।
ऋषि कपूर अपने इलाज के लिए न्यूयॉर्क गए थे। इसी तरह इरफान खान का इलाज लंदन में चला था। बॉलीवुड में यह फेहरिस्त लंबी है। इसमें सोनाली बेंद्रे और मनीषा कोइराला और क्रिकेटर युवराज सिंह जैसे सितारे भी शामिल हैं, जिनका इलाज अमेरिका के ही कैंसर अस्पतालों में हुआ।
एक्सपर्ट मानते हैं कि कैंसर के इलाज में भारत कहीं भी विकसित देशों से पीछे नहीं हैं लेकिन जब लोगों के पास पैसा होता है तो वे और बेहतर के विकल्प खोजते रहते हैं। हां यह जरूर है कि भारत में सभी मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता इसलिए विकसित देशों के मुकाबले डेथ रेशियो ज्यादा है
भारत: साल 2018 में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में कैंसर के मामले कम रहे, लेकिन मौतें ज्यादा हुईं
डब्लूएचओ की ही रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में साल 2018 में महिलाओं में कैंसर के 5.87 लाख मामले आए थे जबकि पुरुषों में यह संख्या 5.70 लाख थी। हालांकि कैंसर से हुईं मौतों के मामले में पुरुषों की संख्या महिलाओं से 42 हजार ज्यादा थी। 2018 में कैंसर से 4.13 लाख पुरुषों की मौत हुई जबकि महिलाओं की संख्या 3.71 लाख थी। पुरुषों में जहां सबसे ज्यादा मामले मुंह और फेफड़ों के कैंसर के आए, वहीं महिलाओं में सबसे ज्यादा मामले ब्रेस्ट और गर्भाशय के कैंसर के रहे।
-भारत में साल 2018 में ब्रेस्ट कैंसर से 87 हजार महिलाओं की मौत हुई यानी हर दिन 239 मौत। इसी तरह गर्भाशय के कैंसर से हर दिन 164 और अंडाशय के कैंसर से हर दिन 99 मौतें हुईं।
दुनिया : 18% मौतें फेफड़ों के कैंसर से
साल 2018 में कैंसर के कुल 1.81 करोड़ मामले आए। इसमें पुरुषों के 94 लाख और महिलाओं के 86 लाख मामले थे। मौतें भी पुरुषों में ज्यादा देखी गई। 53.85 लाख पुरुषों की कैंसर से मौत हुई, वहीं महिलाओं की संख्या 41.69 लाख रही। पुरुषों में सबसे ज्यादा मामले फेफेड़ों, प्रोस्टेट और मलाशय कैंसर के आए। वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट, मलाशय और फेफड़ों के कैंसर के ज्यादा केस थे।
मामले. मौतें
फेफड़े 20.93 लाख 17.61 लाख
ब्रेस्ट 20.88 लाख 6.26 लाख
प्रोस्टेट 12.76 लाख 3.59 लाख
आंत 10.96 लाख 5.51 लाख
अमाशय 10.33 लाख 7.82 लाख
सोर्स: ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी, डब्लूएचओ (आंकड़े-2018)
- दुनियाभर में साल 2018 में कैंसर की 22% मौतों का कारण महज तंबाकू था। गरीब और मिडिल इनकम देशों में कैंसर के 25% मामले हैपेटाइटिस और एचपीवी जैसे वायरस इंफेक्शन के कारण हुए।
दो साल से ल्यूकेमिया से जूझ रहे थे ऋषि कपूर, यह एक तरह का ब्लड कैंसर जिसमें शरीर को बचाने वाली कोशिकाएं ही जानलेवा बन जाती हैं
मित्रों जागरूकता का समय है अब घर-घर में जागरूकता की क्रांति लाना आवश्यक है किस प्रकार से हम अपने घरों से कैंसर को समाप्त कर सकते हैं विश्व के बड़े-बड़े इंस्टिट्यूशन इस पर काम कर रहे हैं कैंसर का तेजी से फैलने का एक प्रमुख कारण भारत में बहुत अधिक मात्रा में पेस्टिसाइड का प्रयोग खाद्य पदार्थों की वस्तुओं पर हो रहा है और यह महिलाओं के ऊपर सबसे ज्यादा असर डाल रहा है क्योंकि सुबह से लेकर शाम तक घर की महिलाएं पेस्टिसाइड और केमिकल के संपर्क में पुरुषों की अपेक्षा बहुत ज्यादा रहती हैं चाहे बर्तन धोना हो चाहे बाथरूम टॉयलेट साफ करना हो कपड़े धोना कॉकरोच को मारने की दवाई का छिड़काव करना या सब्जियों की साफ सफाई करना और उन्हें बनाना एक बहुत बड़ा कारण बन रहा है और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए मुझसे संपर्क कर सकते हैं
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16/12/2020
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