Arpna Health & Permadical
Arpana Sharma
01/06/2026
क्या सच में देश का चौथा स्तंभ अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है?
कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि देश का चौथा स्तंभ कहलाने वाला मीडिया उन वास्तविक समस्याओं को उजागर करने के बजाय उन लोगों पर ही सवाल उठाने लगता है, जो शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं।
कोरोना काल के कठिन समय में जब स्कूल बंद थे, तब कई शिक्षकों और ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म ने लाखों बच्चों की पढ़ाई को जारी रखा और उनके भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन उनके प्रयासों की सराहना करने के बजाय उन पर ही प्रश्नचिह्न लगाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, देश की शिक्षा व्यवस्था में कई गंभीर समस्याएँ आज भी मौजूद हैं—
📌 अनेक सरकारी स्कूलों में समय पर पूरा सिलेबस नहीं हो पाता।
📌 कई बार परीक्षा में आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न पूछे जाते हैं।
📌 उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते रहे हैं।
📌 छात्र महीनों मेहनत करके परीक्षा देते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण परीक्षाएँ रद्द हो जाती हैं और उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है।
इन मुद्दों पर व्यापक और निष्पक्ष चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव देश के करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
मीडिया का दायित्व केवल सवाल उठाना नहीं, बल्कि उन वास्तविक समस्याओं को सामने लाना भी है जो शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं। विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाना और उनकी आवाज़ को देश तक पहुँचाना भी उतना ही आवश्यक है।
शिक्षा पर राजनीति नहीं, समाधान की चर्चा होनी चाहिए।
धन्यवाद सहित साभार अमित जी
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