Rangabhas Natyashala, India

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The National School of Drama's Children Theatre Wing successfully concluded its 30-day Children’s Theatre Workshop at Future Pride School, Indira Nagar, in Neemuch district of Madhya Pradesh, organised in collaboration with Rangabhas Natyashala and Kalavyom Foundation.

The young participants showcased their learning through the play 'Chhoti Chhoti Baatein Duniya Rang Birangi', demonstrating their skills in acting, dialogue delivery, music, movement, and theatrical expression. The production was directed by Shri Susheel Kant Mishra, with Smt. Savitri S. Mishra serving as the Assistant Director.

Shri Rajesh Vyas, Superintendent of Police, Neemuch, who graced the occasion as the Chief Guest, appreciated the National School of Drama's efforts under the leadership of Director Shri Chittaranjan Tripathy and Children Theatre Wing In-charge Shri Suman Vaidya. He also applauded the children's performances and appreciated the confidence, creativity, and talent showcased by the young participants.

The workshop nurtured confidence, creativity, discipline, communication, and leadership among children. The concluding ceremony also featured an exhibition of artwork and crafts created by the participants, highlighting their artistic talents.

All participants were presented with certificates of participation, recognising their month-long journey of learning, creativity, dedication, and self-discipline.

#childrentheatre #theatreineducation #nsd 
@narendramodi @gssjodhpur @raoinderjitsingh @amritmahotsav @ministryofculturegoi @pibindia 26/07/2026

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली, चिल्ड्रन थिएटर विंग्स द्वारा आयोजित रंगाभास नाट्यशाला एवं कलाव्योम फाउंडेशन का संयुक्त आयोजन 30 दिवसीय बालरंगमंच कार्यशाला नीमच शहर मध्य प्रदेश में कार्यशाला का समापन हुआ ।

सर्वप्रथम राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का बहुत बहुत आभार रंगाभास नाट्यशाला को ये अवसर प्रदान करने के लिए हृदय से आभार !

आप सभी गुरुजनों, मेरे प्यारे सीनियरों एवं रंगमंच साथियो का इस कार्यशाला के लिए आशीर्वाद स्वरूप मार्गदर्शन प्राप्त हुआ उसके लिए नीमच शहर के बच्चे और रंगाभास नाट्यशाला आपका ह्रदय आभारी है ।
आपका ऐसे ही आशीर्वाद मिलता रहे। आपका जूनियर और रंगमंच के प्रतिसमर्पित सुशील कान्त मिश्रा.

फ्यूचर प्राइड स्कूल के निर्देशक उमेश किलोरिया और प्रिंसिपल मैडम श्रीमती नीलम किलोरिया का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ उसके लिए आपका बहुत बहुत आभार।

नीमच शहर और दिल्ली शहर के प्रिंट मीडिया द्वारा कार्यशाला का कवरेज किया गए साथ ही नीमच शहर के राजेश सोलंकी जी का हृदय से आभार, आपका कला के प्रति इस तरह के समर्पण के लिए साधुवाद !

Dada Lakhmi Chand State University of Performing and Visual Arts Rangabhas Natyashala, India Suman Vaidya Gajendra Singh Shekhawat Waman Kendre National School of Drama Roots Arunachal Ministry of Culture, Government of India Nagender Sharma कला संकुल - Kala Sankul Chow Riken Ngomle Govind Namdev Kilkari Bihar Bal Bhawan Patna

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The National School of Drama's Children Theatre Wing successfully concluded its 30-day Children’s Theatre Workshop at Future Pride School, Indira Nagar, in Neemuch district of Madhya Pradesh, organised in collaboration with Rangabhas Natyashala and Kalavyom Foundation. The young participants showcased their learning through the play 'Chhoti Chhoti Baatein Duniya Rang Birangi', demonstrating their skills in acting, dialogue delivery, music, movement, and theatrical expression. The production was directed by Shri Susheel Kant Mishra, with Smt. Savitri S. Mishra serving as the Assistant Director. Shri Rajesh Vyas, Superintendent of Police, Neemuch, who graced the occasion as the Chief Guest, appreciated the National School of Drama's efforts under the leadership of Director Shri Chittaranjan Tripathy and Children Theatre Wing In-charge Shri Suman Vaidya. He also applauded the children's performances and appreciated the confidence, creativity, and talent showcased by the young participants. The workshop nurtured confidence, creativity, discipline, communication, and leadership among children. The concluding ceremony also featured an exhibition of artwork and crafts created by the participants, highlighting their artistic talents. All participants were presented with certificates of participation, recognising their month-long journey of learning, creativity, dedication, and self-discipline. #childrentheatre #theatreineducation #nsd @narendramodi @gssjodhpur @raoinderjitsingh @amritmahotsav @ministryofculturegoi @pibindia

Photos from National School of Drama's post 12/07/2026

मध्य प्रदेश के नीमच में 30 दिनों की बाल नाट्य कार्यशाला

" मध्यप्रदेश के नीमच शहर में पहली बार "

" चिल्ड्रन थिएटर वर्कशॉप का आयोजन बच्चों के प्रशिक्षण में उनके कलात्मकता पक्षों को विशेष रूप से ध्यान में रखते हुए की जा रही है। कार्यशाला का उद्देश्य है कि कैसे बच्चों को रंगमंच का प्रशिक्षण उनके बौद्धिक विकास में विशेष भूमिका निभाता है। छोटे - छोटे कस्बे से लेकर छोटे शहरों तक रंगमंच के प्रशिक्षण को बाल्यावस्था में ही क्यों न दिया जाए साथ ही इससे प्रशिक्षकों को उनकी जगह में भेजा जाए साथ ही प्रशिक्षण को कैसे विस्तारित किया जाए। इस कार्यशाला की अनोखी पहल के लिए लिए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निर्देशक श्री चितरंजन त्रिपाठी जी का नीमच शहर वासियों का हृदय से धन्यवाद और आभार ।"

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली
चिल्ड्रन थिएटर विंग्स
कलाव्योंम फाउंडेशन और रंगाभास नाट्यशाला
का आयोजन
बल रंगमंच कार्यशाला 2026
नीमच, मध्यप्रदेश

#कलाव्योम

नीमच में NSD के प्रशिक्षकों द्वारा 30 दिवसीय थियेटर व कला कार्यशाला: अभिनय के गुर सीख रहे बच्चे; 26 जु 12/07/2026

नीमच में NSD के प्रशिक्षकों द्वारा 30 दिवसीय थियेटर व कला कार्यशाला: अभिनय के गुर सीख रहे बच्चे; 26 जु नीमच, 12 जुलाई 2026। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली की चिल्ड्रन विंग्स के तत्वावधान में कलाव्योम फाउंडेशन और रंग....

Photos from Rangabhas Natyashala, India's post 10/07/2026

*कलाव्योम फाउंडेशन के मंच पर जीवंत हुई भारतीय संत परंपरा"

*कलाव्योम फाउंडेशन की राष्ट्रीय मासिक सांस्कृतिक श्रृंखला में संत साहित्य और भक्ति संगीत का अनुपम संगम*

भोपाल। भारतीय संस्कृति, कला और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा अक्षदा सोशल वेलफेयर सोसाइटी, स्वर निषाद संगीत संस्था, रागांजली एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स, रंगाभास नाट्यशाला, समरज्ञ कबीर फाउंडेशन एवं शौर्यनाद के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की मासिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत इस माह 'संतवाणी' का आयोजन कुबेर बैंक्वेट, बाग मुगलिया में किया गया। भारतीय संत परंपरा, भक्ति संगीत और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित इस आयोजन ने संत साहित्य की अमूल्य धरोहर को संगीत के माध्यम से जीवंत करते हुए श्रोताओं को आध्यात्मिक आनंद और सांस्कृतिक चेतना से सराबोर कर दिया।

**तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि**
कार्यक्रम का शुभारंभ हाल ही में दिवंगत पद्म विभूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों सहित उपस्थित सभी जनों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा दो मिनट का मौन रखकर भारतीय लोककला, संत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके अतुलनीय योगदान को विनम्र श्रद्धांजलि दी। उपस्थित जनों ने उनके निधन को भारतीय लोक एवं सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

**कलाव्योम सांस्कृतिक विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ने का सशक्त माध्यम : प्रकाश सिंह ठाकुर**
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रकाश सिंह ठाकुर, निदेशक, उस्ताद अल्लाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी, मध्यप्रदेश ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति, कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन द्वारा आयोजित मासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, भारतीय जीवन मूल्यों और समृद्ध परंपराओं से जोड़ने का सशक्त एवं प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। ऐसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने के साथ-साथ हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

**संतों की वाणी से गूंजा भक्तिमय वातावरण**
कार्यक्रम में संत कबीर दास, संत रविदास, गुरु नानक देव, मीराबाई, सूरदास, तुलसीदास एवं अमीर खुसरो सहित अनेक संत कवियों की रचनाओं पर आधारित भक्ति संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं। स्वर निषाद संगीत संस्था के विद्यार्थियों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की विभिन्न रागों में संत साहित्य को प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मीराबाई के पद 'चलो मन गंगा जमुना तीर चलो' (राग देश) एवं 'बरसे बदरिया सावन की' (राग मियां की मल्हार) से हुआ। इसके बाद कबीर दास, गुरु नानक देव जी, स्वामी दयानंद सरस्वती तथा अमीर खुसरो की रचना 'छाप तिलक सब छीनी' सहित 'राम नाम रस पीजे' और 'ठुमक ठुमक पग' जैसे लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
अनिरुद्ध शुक्ला, प्रखर पंडित, मीरा तिवारी, यति विश्वकर्मा, वंशिका केशवानी, अवंतिका एवं मुस्कान ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से श्रोताओं की भरपूर सराहना अर्जित की। संगत में अभिजीत गढ़ेकर एवं समक्ष श्रीवास्तव ने सुमधुर सहयोग दिया। कार्यक्रम का सह-निर्देशन अंकुश मालवीय तथा संकल्पना एवं निर्देशन आकाश गुंटीवार ने किया।

**भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का सतत अभियान : कलाव्योम फाउंडेशन**
कलाव्योम फाउंडेशन का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, साहित्यिक, लोक एवं रंग परंपराओं का संरक्षण, संवर्धन तथा नई पीढ़ी तक उनका प्रभावी प्रसार करना है। इसी उद्देश्य के साथ फाउंडेशन देशभर में संगीत, रंगमंच, साहित्य, लोककला, चित्रकला, बाल रंगमंच, कार्यशालाओं, व्याख्यानों, कवि सम्मेलनों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विविध सांस्कृतिक आयोजनों का नियमित संचालन कर रहा है।
फाउंडेशन द्वारा भोपाल में आयोजित मासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रृंखला का उद्देश्य देशभर के कलाकारों, साहित्यकारों एवं कला साधकों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, जहाँ वे अपनी कला का प्रदर्शन करने के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभा सकें। संस्था विशेष रूप से युवा पीढ़ी एवं बच्चों को भारतीय कला, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं, रचनात्मक गतिविधियों तथा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन करती है।

**कलाव्योम फाउंडेशन की अनूठी पहल को मिल रहीं सराहना, संस्कृति के माध्यम से सशक्त हो रहा सामाजिक जुड़ाव**
कार्यक्रम में शहर के साहित्यकारों, संगीतज्ञों, कलाकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में संस्कृति प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। उपस्थित जनों ने साहित्य एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कलाव्योम फाउंडेशन की एक सार्थक, प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय पहल बताया।
उपस्थित साहित्यकारों, कलाकारों एवं संस्कृति प्रेमियों ने कहा कि आज के सोशल मीडिया प्रधान दौर में, जब लोग आपसी संवाद और सामाजिक संबंधों से धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं, ऐसे समय में कलाव्योम की मासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रृंखला समाज को एक साझा सांस्कृतिक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इन नियमित आयोजनों के माध्यम से कलाकार, साहित्यकार, बुद्धिजीवी और संस्कृति प्रेमी प्रतिमाह एक-दूसरे से मिलते हैं, विचारों का आदान-प्रदान करते हैं तथा भारतीय कला, संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साझा संकल्प को सशक्त बनाते हैं।
उपस्थित जनों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि समाज में आत्मीयता, संवाद, सद्भाव, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं।

Photos from Rangabhas Natyashala, India's post 06/07/2026

अभिनय की शुरुआत खुद को समझने से होती है...

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली द्वारा कलाव्योम फाउंडेशन एवं रंगाभास नाट्यशाला के सहयोग से इंदिरा नगर स्थित फ्यूचर प्राइड स्कूल परिसर में आयोजित 30 दिवसीय बाल रंगमंच एवं अभिनय कार्यशाला में बच्चों को अभिनय की बारीकियों के साथ अपनी मौलिक अभिनय शैली विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 25 जून से प्रारंभ हुई इस नि:शुल्क कार्यशाला में नीमच के विभिन्न विद्यालयों के 40 प्रतिभागी प्रतिदिन शाम 3 बजे से 7 बजे तक उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

कार्यशाला का निर्देशन अभिनेता एवं रंगकर्मी सुशील कांत मिश्रा कर रहे हैं, जबकि सावित्री मिश्रा बच्चों को वॉइस एंड स्पीच, स्टोरी टेलिंग, एकाग्रता, अवलोकन क्षमता तथा लय (रिद्म) का प्रशिक्षण दे रही हैं। वहीं, मिश्रा विभिन्न खेल-आधारित गतिविधियों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से बच्चों को अभिनय, मंच अनुशासन तथा रंगमंच के तकनीकी पक्षों से सहज रूप में परिचित करा रहे हैं।

कार्यशाला समन्वयक अपर्णा भोसले ने विषय विशेषज्ञ के रूप में बच्चों को रंगमंच में शिक्षा के महत्व पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि रंगमंच केवल अभिनय की कला नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, संवाद कौशल, संवेदनशीलता, अनुशासन और रचनात्मक चिंतन का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि रंगमंच के माध्यम से प्राप्त अनुभव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता को सशक्त बनाते हैं।

कार्यशाला में अभिनय को केवल संवाद और अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे आत्म-अन्वेषण और व्यक्तित्व विकास की एक सृजनात्मक प्रक्रिया के रूप में समझाया जा रहा है। प्रशिक्षकों का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति की सोच, संवेदनाएँ और व्यक्तित्व अलग होते हैं, इसलिए हर अभिनेता का चरित्र गढ़ने का अपना अलग तरीका अर्थात अपना "मेथड" होता है। कोई कलाकार किसी विशेष अभिनय पद्धति का अनुसरण करता है, तो कोई अपने अनुभव और सहजता के आधार पर किरदार को जीवंत करता है। वास्तव में किसी एक तय मेथड का पालन न करना भी अपने आप में एक अभिनय पद्धति है।

मेथड नहीं, परिणाम तय करते हैं अभिनय की सफलता

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को बताया जा रहा है कि एक अभिनेता अपनी नर्वसनेस पर किस प्रकार नियंत्रण पा सकता है और अभिनय की शुरुआत कैसे करनी चाहिए। प्रशिक्षक समझा रहे हैं कि जिस प्रकार किसी भाषा को सीखने के लिए उसके अक्षरों और शब्दों को समझना आवश्यक होता है, उसी प्रकार अभिनय में भी किसी चरित्र को आत्मसात करने से पहले स्वयं को समझना जरूरी है।

प्रशिक्षकों के अनुसार, अपने अभिनय के "मेथड" की खोज प्रत्येक अभिनेता की व्यक्तिगत यात्रा है, जिसे निरंतर जारी रखना चाहिए। हर कलाकार की अपनी कार्यशैली होती है और वही उसकी अभिनय शैली को विशिष्ट बनाती है। अभिनय में कोई एक तरीका अंतिम या सर्वश्रेष्ठ नहीं होता, बल्कि जिस पद्धति से प्रभावी परिणाम प्राप्त हों, वही उस कलाकार के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

कार्यशाला में बच्चे अभिनय के साथ-साथ आत्मविश्वास, संवाद कौशल, टीमवर्क, रचनात्मक सोच और मंचीय अनुशासन जैसी महत्वपूर्ण जीवनोपयोगी क्षमताओं का भी विकास कर रहे हैं। प्रतिभागियों में सीखने का उत्साह और रंगमंच के प्रति बढ़ती रुचि कार्यशाला को और अधिक जीवंत बना रही है।

कार्यशाला का समापन 26 जुलाई को होगा। समापन समारोह में प्रतिभागी बच्चों द्वारा कार्यशाला के दौरान तैयार किए गए नाटक का मंचन किया जाएगा, जो उनकी सीख, रचनात्मकता, अभिनय क्षमता और रंगमंचीय कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन होगा।

National School of Drama, ministry of culture Dharmendra Singh Lodhi mla Collector Office Neemuch

03/07/2026

National School of Drama, New Delhi ke Children Wings dwara Kalavyom Foundation aur Rangabhas Natyashala ke sath sahyog mein Neemuch (M.P.) mein ek Children's Theatre Workshop ka aayojan kiya gaya. Iss workshop mein Savitri S. Mishra (NSD TIE Tripura se prashiksh*t) ne bachchon ko voice aur speech, story telling, concentration, observation, rhythm ka prashikshan diya. Workshop ke nirdeshak Susheel Kant Mishra ne bachchon ko stage ke technical paksh par aware karne ke liye game ke madhyam se prashikshan prapt karaya. Neemuch ke 70 se 80 bachchon ne is workshop mein badh chadh kar bhagidari ki aur apni pratibha ko nikharne ka prayas kar rahe hain.

#कलाव्योम

Photos from Rangabhas Natyashala, India's post 02/07/2026

रंगाभास नाट्यशाला के सहयोग से आयोजन '' संत वाणी "

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