Quantum Reiki

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रेकी चिकित्सक, म्यूजिक थैरेपी, कलर थैरेपी, भजन गायक

🌅 #गुजरात#में#दहेज #इंडस्ट्रियल #क्षेत्र में रविवार सत्य#नारायण#जी#कथा एवं#समुद्र एवं#दहेज का#ता 18/06/2026

https://youtu.be/flQ7cKU1paw?si=VP9fjsUK7IWeJyf6🌅जो व्यक्ति स्वयं को जान लेता है, उसके भीतर का सारा अंधकार समाप्त हो जाता है। वह शुद्ध प्रकाश की एक घटना बन जाता है। और उसका यह प्रकाश अत्यंत सूक्ष्म, कोमल और नाजुक होता है।

यह उस विकिरण (रेडिएशन) जैसा नहीं है जो किसी परमाणु विस्फोट से निकलता है। परमाणु विस्फोट का विकिरण सबको प्रभावित करता है; आप खुले हैं या बंद, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वह एक हिंसक आक्रमण है, जो उसके संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति पर प्रभाव डालता है।

लेकिन जो व्यक्ति जाग्रत हो गया है, उसका विकिरण अत्यंत कोमल होता है। वह एक सुगंध की तरह है।

यदि आपके भीतर उसे ग्रहण करने की समझ और साहस है, तभी आप उसे जान पाएँगे; अन्यथा हजारों लोग Gautam Buddha के पास से गुज़रे, लेकिन उन्हें कुछ भी अनुभव नहीं हुआ। वे हैरान थे कि दूसरे लोग इतना कुछ क्यों महसूस कर रहे हैं, क्यों उनकी आँखों से आनंद के आँसू बह रहे हैं।

जाग्रत, प्रबुद्ध व्यक्ति का विकिरण आक्रामक नहीं होता। यह समझने योग्य सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है। वह किसी भी तरह आपकी व्यक्तिगतता का अतिक्रमण नहीं करेगा, जब तक कि आप स्वयं उसे आमंत्रित न करें; जब तक कि आप स्वागत की अवस्था में न हों; जब तक कि आप उसकी प्रतीक्षा न कर रहे हों।

जब तक आप मेज़बान बनने के लिए तैयार नहीं हैं, वह आपके द्वार पर दस्तक नहीं देगा।

और स्वाभाविक है कि यदि वह आपके द्वार पर दस्तक नहीं देता, तो आपको लगेगा कि जो लोग इस प्रकाश, इस आनंद, इस विकिरण का अनुभव कर रहे हैं, वे कुछ अजीब लोग हैं। क्योंकि अधिकांश मानवता ने इसका अनुभव नहीं किया है। अधिकांश लोग पूरी तरह बंद हैं — उनके हृदय की एक भी खिड़की खुली नहीं है।

यह लगभग वैसा ही है जैसे कोई अंधा व्यक्ति यह कहे कि न सूर्य है और न प्रकाश। उसकी दृष्टि से वह सही है। उसने कभी सूर्य नहीं देखा, उसने कभी प्रकाश नहीं देखा।

निश्चित ही एक ऐसा विकिरण है जो सर्वोच्च गुणवत्ता का है, लेकिन वह केवल उन्हीं के लिए उपलब्ध है जो अपनी चेतना को भी उस ऊँचाई तक उठा सकें। और यदि चेतना अभी वहाँ तक न पहुँची हो, तो कम से कम उनकी तड़प, उनकी प्यास, उनका खुलापन तो हो।

तब दूर का कोई तारा भी दिखाई देने लगता है।

लेकिन यदि आप आँखें बंद किए खड़े हैं और अपनी बंद आँखों पर ही अड़े हुए हैं, तो आपकी सहायता करना लगभग असंभव हो जाता है। आप स्वयं अपने सबसे बड़े शत्रु हैं। और आप स्वयं अपने सबसे बड़े मित्र भी बन सकते हैं।

आप अपने सबसे बड़े मित्र तब बनते हैं जब आप स्वयं को उच्चतर वास्तविकताओं, चेतना की ऊँची परतों और दूरस्थ तारों के लिए उपलब्ध कर देते हैं।

जैसे-जैसे आपका हृदय खुलता है, वैसे-वैसे आपके पंख भी खुलने लगते हैं। जाग्रत व्यक्ति से प्रस्फुटित हो रहे प्रकाश को समझने के साथ एक समकालिकता (सिंक्रोनिसिटी) घटित होती है।

शुरुआत में आपका हृदय भी काँपने लगता है। फिर यह कंपन नृत्य में बदल जाता है। और एक क्षण ऐसा आता है जब गुरु की धड़कन और आपकी धड़कन एक हो जाती हैं।

सारे विभाजन, सारी दूरियाँ, सारा अलगाव विलीन हो जाता है।
💜 #ओशो #🤎
(सत्यम् शिवम् सुन्दरम्, अध्याय 21)
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🌅 #गुजरात#में#दहेज #इंडस्ट्रियल #क्षेत्र में रविवार सत्य#नारायण#जी#कथा एवं#समुद्र एवं#दहेज का#ता जो व्यक्ति स्वयं को जान लेता है, उसके भीतर का सारा अंधकार समाप्त हो...

🌅#हीलिंग#बिज़#मंत्रात्मक#दुर्गा#सप्तति#पाठ#फिनोटेक#डिजिटल#प्राईवेट#लिमिटेड#इंदौर#में #जय#माता 11/02/2026

https://youtu.be/4Pj6KSoRnkQ?si=GNKP-cIAR0vItMV2🌄 #प्रार्थना की तरह भजन भी धन्यवाद-ज्ञापन मात्र है?

प्रार्थना बीज है, भजन वृक्ष। प्रार्थना अप्रकट है, भजन प्रकट। भजन नाचती हुई प्रार्थना है, गाती हुई प्रार्थना है। भजन अभिव्यक्ति है प्रार्थना की।
अगर प्रार्थना देखनी है, तो तुम्हें महावीर और बुद्ध में दिखाई पड़ेगी; अगर भजन देखना है तो मीरा और चैतन्य में। #बुद्ध और महावीर में जो भीतर सम्हला हुआ है, मीरा और #चैतन्य में बाहर बह गया है। बुद्ध और महावीर में जो थिर है, मीरा और चैतन्य में नाच उठा है। भजन प्रार्थना की अभिव्यंजना है।

ऐसा समझो कि तुम्हें किसी के प्रति प्रेम है। तुम इसे भीतर भी रख सकते हो, कोई जरूरत नहीं कहने की। कभी तुम ऐसा न भी कहो कि मुझे तुझसे प्रेम है, तो भी चलेगा; तुम भीतर ही भीतर रख सकते हो, सम्हाले रखते हो। अक्सर स्त्रियां किसी को कहती नहीं कि उन्हें प्रेम है; सम्हाल कर रखती हैं। है--कहना क्या; होना काफी है। लेकिन कभी प्रेम प्रकट भी होता है--कभी गीत में, कभी हाथ के स्पर्श में, कभी आंख की भाव-व्यंजना में, कभी मौन में भी। लेकिन जब भी प्रकट होता है, तब फूल खिल जाते हैं; बीज बीज नहीं रह जाता। दोनों सुंदर हैं।

दो तरह के लोग हैं दुनिया में। कुछ लोग हैं, जिन्हें प्रार्थना काफी है; कहने की कोई जरूरत नहीं है; जो अपने शून्य में और #मौन में परमात्मा को साध लेंगे। फिर दूसरे तरह के लोग भी हैं: जिनको इतना काफी न होगा; जब तक काफी से ज्यादा न हो जाए, उन्हें काफी न होगा; जब तक उनके ऊपर से जलधार बहने न लगे; जब तक उनकी प्याली इतनी लबालब न हो जाए कि बंटने लगे, बाहर उलिचने लगे, तब तक काफी न होगा।

मीरा नाच उठती है; बुद्ध के प्याले से जो छलकता नहीं, मीरा से छलक जाता है। दोनों शुभ हैं।
तुम अपनी #प्रकृति को पहचानना। अगर तुम भीतर रखना चाहो, कोई हर्जा नहीं है; लेकिन अगर बांटना चाहो, तो भी कोई हर्जा नहीं है। और दोनों में मैं कोई तुलना नहीं करता। बीज भी सुंदर है, क्योंकि फूल उसी से आता है; और फूल भी सुंदर है, क्योंकि फिर बीज बन जाते हैं। दोनों जुड़े हैं।
अभिव्यक्ति-अनभिव्यक्ति दोनों जुड़े हैं; प्रकट-अप्रकट दोनों जुड़े हैं। तुम अपनी प्रकृति को खोज लेना; तुम्हें जो रुचिकर लगे। लेकिन ध्यान रखना, भजन #अभिव्यक्ति है, प्रार्थना मौन है।

पूछा है कि क्या प्रार्थना की तरह भजन भी धन्यवाद-ज्ञापन मात्र है?

नहीं। #प्रार्थना धन्यवाद है, भजन #अहोभाव। प्रार्थना कहती है: जो दिया, वह बहुत है; जो दिया, उससे संतोष है; जो दिया, उससे गहन #तृप्ति है। लेकिन भजन कहता है: जो दिया, वह जरूरत से ज्यादा है; उसे बांटना है; वह सम्हलता नहीं, सम्हाले नहीं सम्हलता; उसे लुटाना है। भजन #नाचता है, कहता नहीं; #भजन #बोलता है, अनबोला नहीं है। भजन का अपना सौंदर्य है।

प्रार्थना न गाया हुआ गीत है; #चित्र है, #चित्रकार के मन में छिपा, कैनवस पर नहीं आया; मूर्ति है पत्थर में दबी, अभी छैनी से काटी नहीं गई, प्रकट नहीं हुई।
भजन प्रकट मूर्ति है। पत्थर काटा गया है, छैनी ने काम कर दिया है। भजन गाया हुआ गीत है।
रवींद्रनाथ मरे। मरने के दो दिन पहले एक मित्र मिलने आया और उसने कहा कि चिंतित होने की तो कोई जरूरत नहीं, तुम्हारा जीवन तो सफलता का जीवन था। पुराने साथी हैं दोनों; बचपन के मित्र हैं; दोनों बूढ़े हो गए हैं। दूसरे ने कहा कि तुम तो शांति से मर सकते हो, दुख से मरें तो हम--कुछ पाया नहीं, ऐसे ही गंवा दिया जीवन। तुमने इतने गीत गाए! छह हजार गीत #रवींद्रनाथ # ने गाए। कहते हैं, इतने गीत संसार में किसी कवि ने नहीं गाए। पश्चिम में महाकवि शैली का नाम है, पर उसके भी गीत तीन हजार हैं। रवींद्रनाथ के गीत छह हजार हैं। और छह हजार ही गीत संगीत में बांधे जा सकते हैं। नोबल पुरस्कार तुम्हें मिला, उस बूढ़े ने कहा; तुम सब तरह से सम्मानित हुए, तुम शांति से मर सकते हो; अशांति से मरें हम; तुम तो विदा हो सकते हो; तुम #परमात्मा # को #धन्यवाद # दे सकते हो।

रवींद्रनाथ यह सब सुनते रहे, फिर उन्होंने कहा कि सुनो, मैं जो गीत गाना चाहता था, वह अभी तक गा नहीं पाया; वह अभी भी मेरे भीतर बीज की तरह पड़ा है। वे जो छह हजार मैंने गाए, वे मेरी असफल चेष्टाएं हैं उस एक #गीत # को गाने के लिए। वह जो गीत मेरे भीतर बीज की तरह पड़ा है, उसको गाने के लिए मैंने चेष्टाएं की हैं, हर बार असफल हुआ हूं। तुमने उन गीतों में कुछ पाया होगा, मेरी वे असफलता की कथाएं हैं। और मेरा गीत अभी गाया गया नहीं है, अभी मैं बिनगाया पड़ा हूं।

अगर तुम्हें बुद्ध की भांति चुप बैठ जाना, मौन में डूब जाना, कि अंग भी न हिले...
बुद्ध और #महावीर की प्रतिमाएं संगमरमर की हमने बनाईं, अकारण नहीं। वे ऐसे ही संगमरमर जैसे बैठे थे। वे जब थे मौजूद, तब भी निष्कंप थे। अब मीरा की प्रतिमा तुम संगमरमर में बनाओ, जंचेगी न। बनाई है लोगों ने, जंचती नहीं। अगर मीरा की प्रतिमा बनानी हो तो जल की बनानी पड़ेगी; वह बनती नहीं--नाचती हुई, तरल--ठहरी हुई नहीं।

#मीरा # एक गति है; एक भावभंगिमा है; एक नृत्य है।
महावीर एक ठहराव हैं। महावीर एक सरोवर हैं, जहां तरंग भी नहीं उठती।
मीरा एक जलधार है पर्वत से गिरती--जलप्रपात है; जहां बूंद-बूंद नाच रही है।
बड़े भेद हैं, पर भेद मार्ग के हैं। अंततः सरोवर भी सूरज की किरणों पर चढ़ कर आकाश में खो जाता है और नदी भी समुद्र में गिर कर सूरज की किरणों पर चढ़ कर आकाश में खो जाती है।

मंजिल एक है, मार्ग अलग हैं। मंदिर एक है, द्वार अनेक हैं। अपना द्वार चुन लेना, दूसरे का अनुकरण मत करना।
अनुकरण करने से #संप्रदाय #पैदा होता है, स्वभाव के अनुकूल चलने से धर्म।

🧡 #ओशो💛
भज #गोंविंदम #मुढ़मते (आदि #शंक्राचार्य) प्रवचन--04
💜 #ओशो #🤎
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🌅#कान्हाश्री#गार्डन#में#जादौन#के वर#वधू#शुभ#विवाह#के#अनमोल#पल#की#हार्दिक#शुभकामनाएं#एवं#बधाइया 04/12/2025

https://youtu.be/i8vOkWxgSD0?si=gvbgWZNc1L73eEHp🌅आज बात करते हैं, कि क्षत्रिय क्या हैं,और क्या है इनका इतिहास.

वैसे हमारे कुछ विरोधी शुरू से ही हमारा इतिहास विकृत करने के लिए, जलनवश , #रामायण ,महाभारत को कल्पना कहते आये हैं,पर ये हमारा स्वर्णिम प्राचीन इतिहास है. जिसके साक्ष्य आज भी जिंदा हैं..
क्षत्रिय वो है, जिसने पोरस के रूप में सिकन्दर को भारत से खदेड़ दिया था.।

जिस इस्लाम ने 45 वर्षो में 90 देशों को #इस्लामिक बना लिया था,उसको भारत मे घुसने में 500 साल लगे, सिर्फ इन क्षत्रियों की वजह से..
क्षत्रिय वो हैं, जिसने दुनिया के सबसे बड़े किले बनवाये,जिसके #आर्किटेक्चर को देखने दुनिया से लोग भारत आते हैं..जिसमे #चितौड़गढ़, #कुम्भलगढ़ #, ग्वालियर फोर्ट, #खजुराहो जैसे अविश्वसनीय विशालकाय स्थल हैं..
क्षत्रिय वो हैं,जिससे बचने के लिए महमूद गजनवी ने सोमनाथ लूट के बाद #रेगिस्तान का रास्ता चुना,वो अज़मेर के चौहानों से भय खाता था...
क्षत्रिय वो हैं जिन्होंने तराइन में गौरी को हराकर जीवन दान दिया. और इसी गौरी को #भीमदेव सोलंकी ने भी गुजरात से मारकर भगाया था.
क्षत्रिय वो हैं, जिन्होंने हमीर सिंह #सिसोदिया के रूप में सिंगोली युद्ध मे मोहम्मद विन तुगलक को धूल चटाई थी. और बन्दी बनाकर रखा .
क्षत्रिय वो हैं,जिन्होंने इल्तुतमिश जैसे आक्रांता को कई बार अपने क्षेत्रों से भगाया .
क्षत्रिय वो हैं, जिसने अलाउदीन खिलजी जैसे क्रूर आक्रांता के आगे हार नही मानी, लाखो #क्षत्रिय मरे और मारा भी.

क्षत्रिय वो हैं, जिसने राणा कुम्भा के रूप में भारत को एक महान आर्किटेक्ट दिया,जिसने अपने जीवनकाल में 32 दुर्गों का निमार्ण कराया, जिसमे विश्व की सबसे बड़ी दीवार, #कुम्भलगढ़ की दीवार भी शामिल है.
ये वही राणा कुम्भा हैं, जिन्होंने गुजरात और मालवा के सुल्तान को हराकर, विजयस्तम्भ का निर्माण कराया था...
क्षत्रिय वो है,जिसने डूबते भारत के अस्तित्व को राणा सांगा के रूप में आखिरी उम्मीद को जन्म दिया, जिसने इब्राहिम लोधी, और बाबर जैसे शासक को धूल चटाई थी...
क्षत्रिय वो है, जिसकी बजह से इसी दौर में विजयनगर व उड़ीसा जैसे सम्राज्य में केसरिया लहराता रहा.
क्षत्रिय वो है जिसने #कलिंजर युद्ध मे शेर शाह शूरी को रौंद डाला था..और वो मारा गया. ये वही शेरशाह शूरी है जिसने गिरी-सुमेल के युद्ध के बाद क्षत्रियोँ के लिए कहा था,की एक मुट्ठी बाजरे के खातिर मैं अपनी सल्तनत खो देता. इस युद्ध मे 6000 राजपूतो का सामना 80 हज़ार अफगानों से था.
क्षत्रिय वो हैं, जिसने गुलाम होते भारत मे एक बार फिर एकलौती किरण को जन्म दिया था, #महराणा प्रताप के रूप में, जिसने भारत का मान रखा, ये एकलौता ऐसा राजा था देश का जो अकबर के सामने नही झुका, और तो और हल्दीघाटी, दिवेर जैसे युद्ध मे अकबर को धूल भी चटाई .
क्षत्रिय वो है, जिसने #बुंदेलखंड से छत्रसाल के रूप में औरंगजेब को खदेड़ा, और बुंदेलखंड को स्लाम मुक्त कराया .
क्षत्रिय वो है जिसने खालसा धर्म की रक्षा की ,वीर बंदा बहादुर व बज्जर सिंह #राठौड़ के रूप में .
क्षत्रिय वो है, जो लद्दाख को, लड़कर भारत के नक्से में लाये,जनरल जोरावर सिंह जैसे रूप में.
क्षत्रिय वो हैं,जिन्होंनें अग्रेंजो के खिलाफ सबसे बड़ा मोर्चा लिया, बाबू कुंवर सिंह, ठाकुर कुशाल सिंह आउआ,राम प्रसाद विस्मिल,ठाकुर रोशन सिंह,महावीर सिंह राठौड़ जैसे सैकड़ो महान क्रांतिकारियों के रूप में . या फिर प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सैनिकों के रूप में ...
क्षत्रिय वो हैं जिन्होंने 19वी सदी में भी,7 समुन्द्र पार जाकर विदेशी ताकतों से #राकेशइजरायल को आजाद कराया, #जोधपुर लांसर के रूप में, वो भी तब जब तलवारों का मुकाबला ,मशीनगन से था..इजरायल आज भी हमे सम्मान देता है.
क्षत्रिय वो हैं, जो इस जनतन्त्र में भी सबसे ज्यादा शहीद होने वाली कौम है, सेना में सबसे ज्यादा वीरता मैडल इन्ही राजपूतो के पास हैं यंहा तक कि 5 परमवीर चक्र..
क्षत्रिय वो हैं जो थार रेगिस्तान में भी महल बनादे, जो आज 900 साल बाद भी हमारे इतिहास की गवाही देता है, रेगिस्तान में बना जैसलमेर महल , दुनिया के लिए एक अजूबा है..
क्षत्रिय वो है जिसने आधुनिक भारत को सबसे बड़ा खगोलशास्त्री दिया,सवाई जय सिंह जी जिन्होंने जंतरमंतर नाम की दुनिया की सबसे बड़ी खगोल वैधशाला बनाई.
क्षत्रिय वो है जो आज भी भारत को सम्मान दिलाते हैं, भारत के 3 शहर जयपुर,जोधपुर, उदयपुर किसी ना किसी बजह से भारत का नाम दुनिया मे रोशन करते रहते हैं..
क्षत्रिय वो है जिसकी बजह से आज भी भारत को सबसे ज्यादा टूरिस्ट रेवन्यू व रोजगार मिला हुआ है, भारत मे सबसे ज्यादा टूरिस्ट राजस्थान में ही आता है, वो भी सिर्फ इन क्षत्रियो द्वारा बने शहरों,नगरों,महलों को देखने, इसी टूरिज्म से पूरे राजस्थान में लाखों लोगों का जीबन यापन होता है...इसकी कड़ी में मध्यप्रदेश, गुजरात भी है..यंहा भी 80% टूरिज्म इन्ही क्षत्रियोँ की देन है..
क्षत्रिय वो हैं जो आज भी सनातनधर्म की परम्परा की झलक पूरे विश्व को दिखाते हैं.
विदेशी शासक कहते हैं,की ऐसे राजपूत योद्धा मेरी सेना में हों तो मैं संसार को जीत लेता।
एसे हजारों हजार प्रमाण भरे हैं अतित में। क्षत्रियों की वीरता और शौर्यगाथाओं का गुणगान कंहा तक और कितना किया जाए क्यूंकि ये महानता का वो अथाह सागर है जो कि युगों युगों से बहता आ रहा है। शायद इस सृष्टि के प्रारम्भ से ही।तो फिर क्यूं न गर्व करे हम अपने रक्त पर क्यूं भुल गए हम अपनी रक्त शक्ति को क्यूं गुलाम हो रहें हैं हम आज राजनीतिक दलों के । विचार अवश्य करें 🙏
कृतिका जी वॉल से
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